Tuesday, August 5, 2014

TET is mandatory to become RTE Teacher - Smriti Irani

बगैर टी ई टी किये नहीं बन सकते  RTE शिक्षक  - केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी 
TET is mandatory to become RTE Teacher - Smriti Irani


Teachers who are appointed have to possess requisite qualification prescribed by the National Council for Teacher Education (NCTE) and pass the Teacher Eligibility Test (TET)





Over 600,000 primary teachers' posts lying vacant

Over 600,000 posts of teachers at primary level are lying vacant under the state sector and the national literacy mission, parliament was informed on Monday.

"The total teachers post lying vacant at the primary level both under the state sector and the Sarva Shiksha Abhiyan are 6, 06, 191," human resource development Minister Smriti Irani told the Rajya Sabha in a written reply.

"The states recruits teachers based on their recruitment rules. However, teachers who are appointed have to possess requisite qualification prescribed by the National Council for Teacher Education (NCTE) and pass the Teacher Eligibility Test (TET)," she added.
Irani said that the recruitment of teachers on contract basis therefore does not affect the quality of teaching adversely as all teachers recruited have to meet the educational qualification as well as professional qualifications.

"However, professional qualifications are sometimes relaxed under section 23 of the right of children to free and compulsory education (RTE) Act, 2009 for states where there is a shortage of professionally qualified teachers, with the provision that they acquire the same through a two year training programme in distance mode," she said.

Irani also informed that the pupil teacher ratio (PTR) has improved nationally to 1:25 and most states barring Bihar, Jharkhand and Uttar Pradesh have normative PTRs.

News : Times of India India Times (5.8.14)

Thursday, July 24, 2014

RTE हरियाणा में RTE ऐक्ट 12वीं तक बढ़ेगा

हरियाणा में RTE ऐक्ट 12वीं तक बढ़ेगा



 


चंड़ीगढ़ : हरियाणा की शिक्षामंत्री गीता भुक्कल ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की उप समिति ने अपनी मूल्यांकन रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया है और इसे जल्द लागू कर दिया जाएगा। भुक्कल ने कहा कि देशभर के स्टेक होल्डर्स से सलाह-मशविरा करने के बाद उनकी अध्यक्षता में सब कमिटी ने पाया कि हर उम्र के छात्रों का असेसमेंट किया जाना चाहिए, जिससे किसी भी उम्र में छात्रों के सीखने के स्तर में सुधार हो। उन्होंने कहा कि सरकार राइट टु एजुकेशन ऐक्ट का विस्तार 12वीं तक बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। मालूम हो कि इस समय यह व्यवस्था केवल 8वीं तक ही है।

भुक्कल ने कहा कि नो डिटेंशन की नीति छात्रों के सीखने के स्तर में सुधार लाने में सहायता नहीं कर रही है। यदि हम छात्रों को उनके प्रदर्शन के अनुसार फेल नहीं करते हैं तो उस स्थिति में छात्रों, टीचर और पैरंट्स में से किसी का भला नहीं होगा। फिर इससे मेधावी छात्र खुद को प्रोत्साहित महसूस नहीं करेंगे। इस तरह छात्रों के लिए परीक्षा और मूल्यांकन के सिस्टम को अपनाना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से टीचरों और छात्रों का उत्तरदायित्व भी तय हो जाएगा।

News Sabhaar : नवभारत टाइम्स | Jul 22, 2014, 07.27PM IST


Saturday, June 21, 2014

आज के सिस्टम पर प्रहार करता बेहतरीन लेख

आज के सिस्टम पर प्रहार करता बेहतरीन लेख

अनजान लेखक ने गांव में दी जाने वाली शिक्षा पर एक बेहतरीन व्यंग्य लेख लिखा है 

आज विद्यालय में बहुत चहल पहल है । सब कुछ साफ - सुथरा , एक दम सलीके से ।सुना है निरीक्षण को कोई साहब आने वाले हैं । पूरा विद्यालय चकाचक ।
नियत समय पर साहब विद्यालय पहुंचे । ठिगना कद , रौबदार चेहरा , और आँखें तो जैसे जीते जी पोस्टमार्टम कर दें ।
पूरे परिसर के निरीक्षण के बाद उनहोंने कक्षाओं का रुख किया ।
कक्षा पांच के एक विद्यार्थी को उठा कर पूछा , बताओ देश का प्रधान मंत्री कौन है ?
बच्चा बोला -जी राम लाल ।
साहब बोले -बेटा प्रधान मंत्री ?
बच्चा - रामलाल ।
अब साहब गुस्साए - अबे तुझे पांच में किसने पहुंचाया ? पता है मैं तेरा नाम काट सकता हूँ ।
बच्चा - कैसे काटोगे ? मेरा तो नाम ही नहीं लिखा है । मैं तो बाहर बकरी चरा रहा था । इस मास्टर ने कहा कक्षा में बैठ जा दस रूपये मिलेंगे । तू तो ये बता रूपये तू देगा या मास्टर ?
साहब भुनभुनाते हुवे मास्टर जी के पास गए , कडक आवाज में पूछा - क्या मजाक बना रखा है । फर्जी बच्चे बैठा रखे हैं । पता है मैं तुम्हे नौकरी से बर्खास्त कर सकता हूँ ।
 

गुरूजी - कर दे भाई । मैं कौन सा यहाँ का मास्टर हूँ । मास्टर तो मेरा पड़ोसी दुकानदार है । वो दुकान का सामान लेने शहर गया है । कह रहा था एक खूसट साहब आएगा , झेल लेना ।
 

अब तो साहब का गुस्सा सातवें आसमान पर । पैर पटकते हुए प्रधानाध्यापक के सामने जा पहुंचे । चिल्लाकर बोले , " क्या अंधेरगर्दी है , शरम नहीं आती । क्या इसी के लिए तुम्हारे स्कूल को सरकारी इमदाद मिलती है । 
पता है ,मैं तुम्हारे स्कूल की मान्यता समाप्त कर सकता हूँ ।
जवाब दो प्रिंसिपल साहब ।
 

प्रिंसिपल ने दराज से एक सौ की गड्डी निकाल कर मेज पर रखी और बोला - मैं कौन सा प्रिंसिपल हूँ । प्रिंसिपल तो मेरे चाचा हैं । प्रॉपर्टी डीलिंग भी करते हैं । आज एक सौदे का बयाना लेने शहर गए हैं । कह रहे थे , एक कमबख्त निरीक्षण को आएगा , उसके मुंह पे ये गड्डी मारना और दफा करना ।
 

साहब ने मुस्कराते हुए गड्डी जेब के हवाले की और बोले - आज बच गये तुम सब । अगर आज मामाजी को सड़क के ठेके के चक्कर में शहर ना जाना होता , और अपनी जगह वो मुझे ना भेजते तो तुम में से एक की भी नौकरी ना बचती


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